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भाग 4 | राज्य के नीति निदेशक तत्त्व

भाग 4 – राज्य के नीति निदेशक (अनु. 36 से 51-A) अनुच्छेद परिभाषा – इस भाग में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो, “राज्य” का वही अर्थ है जो भाग 3 में है। इस भाग में अंतर्विष्ट…

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न्याय प्रशासन की परिभाषा

न्याय प्रशासन मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। सामाजिक प्राणी होने के कारण उसकी ईच्छा रहती है कि वह समाज में शांतिपूर्ण तरीके से अपना जीवन यापन करें तथा वह अपेक्षा करता है कि कोई अन्य व्यक्ति उसके शांतिपूर्ण जीवनयापन में…

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विवाह-विच्छेद / तलाक के विभिन्न तरीके

तलाक के प्रकार हम सभी यह जानते है की मुस्लिम विधि में विवाह एक संविदा की तरह होता है क्योंकि इसमें संविदा के तत्व विद्यमान होते है| विवाह के उपरांत जब पति-पत्नी के आपस में विचारों के नहीं मिलने से…

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भारत में जनहित याचिका का विकास

जनहित याचिका (PIL) – यह एक ऐसी याचिका या वाद है, जिसके माध्यम से पीड़ित पक्षकार स्वयं या अन्य कोई व्यक्ति या संस्था द्वारा उसकी ओर से न्यायालय के समक्ष प्रार्थना पत्र पेश किया जा सकता है। लेकिन ऐसे मामले…

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हिन्दू विधि के स्रोत कोन कोनसे है

हिन्दू विधि के स्रोत सुविधा के अनुसार हिन्दू विधि के स्रोत को दो भागों मै विभाजित किया गया है – (1) प्राचीन या मूल स्रोत (2) आधुनिक स्रोत हिन्दू विधि के प्राचीन स्रोत हिन्दू विधि के प्राचीन स्त्रोतों को भी…

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संपरिवर्तन किसे कहते है | What is the Conversion or Trover in hindi – Tort Law

संपरिवर्तन का अर्थ – संपरिवर्तन का तात्पर्य है, जानबूझकर बिना किसी विधिक ओचित्य के किसी व्यक्ति के माल या वस्तु के साथ इस रीती से संव्यवहार करना की, अन्य व्यक्ति जो उस माल के तात्कालिक प्रयोग एंव आधिपत्य का अधिकारी…

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मुस्लिम विधि के स्रोत | Sources Of Muslim Law In Hindi

मुस्लिम विधि के स्रोत | Sources Of Muslim Law In Hindi मुस्लिम कानून एक व्यक्तिगत कानून है जो केवल मुसलमानों पर लागू होता है। यह भारत में अदालतों द्वारा मुसलमानों पर सभी मामलों में नहीं, बल्कि केवल कुछ मामलों में ही…

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वारेन हेस्टिग्ज की 1772 की न्यायिक योजना का वर्णन | अदालत व्यवस्था क्या है?

वारेन हेस्टिग्ज की 1772 की न्यायिक योजना वॉरेन हेस्टिंग्स एक औपनिवेशिक प्रशासक था, जो ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी के रूप में भारत आया था। 1772 से 1785 की अवधि के दौरान, उन्होंने बंगाल के राज्यपाल के रूप में काम किया…

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मुशा का सिद्धान्त, क्या मुशा का हिबा किया जा सकता है इसके अपवाद और हिबा का प्रतिसंहरण

मुशा का अर्थ – मुशा शब्द का शाब्दिक अर्थ – भ्रम है, इसकी व्युत्पत्ति ‘सुयूम’ शब्द से मानी जाती है| मुस्लिम विधि के अनुसार हिबा के सम्बन्ध में इसका अर्थ – ‘किसी सम्पत्ति में अविभाजित भाग’ से है। यानि ऐसी हर प्रकार की संयुक्त अविभाजित सम्पत्ति…

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विधिक अधिकार और विधिक कर्तव्यों का विधिशास्त्र के अनुसार वर्गीकरण

विधिक अधिकार और विधिक कर्तव्य विधिक अधिकार (legal right) और विधिक कर्तव्य (legal duty) दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू है अथवा अधिकार एंव कर्तव्य एक ही नियम एंव घटनाओं के भिन्न भिन्न पहलू है| सभी विधिशास्त्रियों का मत…